બુધવાર, 1 એપ્રિલ, 2009
आज की बात
आज फ़िर एक नई उम्मीद लेके आई है पर लन्दन से आती हुई खबरें देखे तो लगता है कल मुश्किल है । फ्रांसीसी नेता सरकोजी का बयान दिलचस्प है सवाल ये है के वह अपने बयान पर कितने अडग रहते है। मिडिया जगत की बम्बैया ख़बर ये है की धांसू माने जाने वाले कार्टूनिस्ट आर के लक्ष्मन का भी नेनो की प्रचार सामग्री में बेजिज़क उपयोग किया गया है । यह ठीक नाही है भइया ।
મંગળવાર, 31 માર્ચ, 2009
aavo mari sathe अब यह सुविधा गुजराती मैं तो उपलब्ध नही है तो क्या करे ?जब तक गूगल गुजराती मैं न आए तब तक raastra भाषा ही सही। आज इतना ही । कल अवकाश प्राप्त होते ही नई दुनिया में चलेंगे, जहां होंगे सिर्फ़ हम और तुम । देखिये अब हमारे देश की भाषा भी तो सही तरीके से नही लिखी जाती। लेकिन प्रयास बहुत ही अच्छा है । कोई सुजाये, देश का समानार्थी शब्द हिन्दी में कैसे लिखा लिखा जाए तो आपकी बड़ी कृपा होगी ।
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